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अपने राष्ट्र पर सदा न्यौछावर होने को तैयार रहे-बाबा फुलसंदे वाले

उज्जैन। सत्पुरुष बाबा फुलसन्दे वालों ने कहा की थोड़ी देर के लिए भी खाली मत बैठो, खाली आदमी के मन में अंधेरा होता है। उसका मन एक पशु की तरह होता है, जो जगत वन में उसे ले जा कर लहूलुहान करता है। तुम अपनी आत्मा में प्रकाश को इक_ा करो अनंत प्रकाश की साधना करो। हे परमेश्वर जब मैं सुख-दुख के परिधान पहने जगत में आता तुम्हारे देवता मेरे संग संग आते। हे परमेश्वर जीवन के ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर भी तुम्हारी स्तुति के गीत मेरे होठों पर रहते। यह उदगार बाबा फूलसंदे वालों के सतसंग में बाबा ने दिये। यह सत्संग शुक्रवार को स्थानीय चार धाम मंदिर परिसर स्थित सेठ मुरलीधर मानसिंगा यात्रि निवास पर आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि हर वक्त दिल में दुनियां से चलने की रख तैयारी, तेरे द्वार पर परमेश्वर ना जाने कब भेज दे सवारी। कैसे कुदरत का पता पावे वो इंसान जिसके दिल में रात दिन साया करे शैतान। सच्चे गुरु ने ईश्वरीय ज्ञान का जो दीवा तुम्हें थमाया है उसे बुझा मत देना, तुम्हारे संग संग अनगिनत आत्माएं इस प्रकाश में परमेश्वर के महल तक जावेगीं। संसार में आने के बाद जीव इस संसार में अपने मकसद को भूल गया है किंतु सत्पुरुष नहीं भूलते, वे संसार में खोई हुई आत्माओं को चुगते फिरते हैं, उन फूलों की धूल झाड़ के परमेश्वर की अभ्यर्थना में अर्पित कर देते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि अपने राष्ट्र पर सदा न्योछावर होने के लिए और उसकी सेवा के लिए सदा तैयार रहें। मेरे राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक आत्मा से तपस्वी और शरीर से एक मजबूत सैनिक बने जो अपने धर्म की अपने राष्ट्र की सेवा कर सके रक्षा कर सकें। सतसंग मेंं एलबी सिंह भोपाल, अशोक शर्मा, आर्य रमेश भटेजा, वीर सिंह, नरेश कपूर, अभिषेक सिंह आदि भक्तजन मौजूद थे।
संत श्री ने उज्जैन के पौराणिक इतिहास पर भी अपने उद्बोधन दिया। उन्होंने कथा के अंत में कहा कि मेरा प्रत्येक शिष्य और राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति आत्मा से तपस्वी बने। ताकि वह देश का और हमारी धर्म, संस्कृति का प्राण अंत तक रक्षा कर सकें।  महाराज के शिष्य अशोक शर्मा आर्य ने बताया कि एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा संस्था द्वारा देशों में देश के विभिन्न स्थानों पर गुरु जी के प्रवचन का आयोजन किया जाता है इस बार उज्जैन में यह आयोजन किया गया गुरु जी के प्रवचन का लाभ लेने के लिए विभिन्न स्थानों से उनके भक्त यहां पर उज्जैन पहुंचे।   

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