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अवंतिका स्थित बौद्ध धर्म के अवशेषों को संरक्षित कर टूरिज्म केन्द्र बनाया जाए-सुरेन्द्र सांखला

उज्जैन। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य सुरेन्द्र सांखला ने कहा कि उज्जैन एक ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और राजा महाराजाओं की नगरी रही है। अवंति राज्य से सम्राठ अशोक की राजधानी चली और बारह वर्षों तक उज्जैन में सम्राठ अशोक ने रहकर राज किया। उज्जैन में उनके पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा का जन्म हुआ। अखंड भारत पर राज करने वाले राजा की यह राजधानी रही है। बौद्ध कालखंड के महान शासक के ऐतिहासिक धरोहर वैश्य टेकरी जो कि उज्जैन शहर के पूर्व की ओर है। उसका विकास किया जाना उज्जैन शहर के लिए नितांत आवश्यक है। उज्जैन शहर अनादिकाल से भारतीय परंपराओं का गढ़ रहा है। इस कारण से भी प्रत्येक कालखंड में उज्जैन एक ऐतिहासिक नगरी रही है। इस दृष्टि से बौद्ध धर्म के धर्मावलंबियों के लिए भी उज्जैन टूरिज्म केन्द्र को चौमुखी विकास के लिए वैश्य टेकरी को सांची के स्मारक जैसा संरक्षित और विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए भारतीय पर्यटन विकास निगम को विकास के लिए भारत सरकार से धन राशि उपलब्ध कराना चाहिए। वहीं अगर यह विकास प्रारंभ हुआ तो अनेक देश भी इसके विकास में धनराशियां देने को तत्पर खड़े है। इसके विकास से शहर का रोजगार बढ़ेगा और चौहमुखी विकास की संभावनाओं पर मोहर लगेगी।
श्री सांखला ने यह भी कहा कि उज्जैन का कालियादेह महल स्थल भी ऐतिहासिक धरोहर है जो कि राजा महाराजाओं के काल खंडो में परिवर्तित होता आया है। उक्त रमणिक स्थल सम्राट अशोक के राजपाट का केन्द्र रहा है। बाद में इतिहास में अलग अलग राजपाठ के साथ उसका नाम जोड़ा जाता है। कालियादेह महल के पास बने सूर्य मंदिर का नाता बौद्ध धर्म और सम्राठ अशोक महान के राजपाठ से रहा है। वर्तमान में सिंधिया राज घराने का आधिपत्य है। वहीं मराठाओं के राजपाट का भी मुख्य केन्द्र रहा है। जिसके विकास की अनंत संभावनाएं बनी हुई है। किंतु इस पर कोई काम नहीं होना  उज्जैन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उज्जैन का अलग अलग ऐतिहासिक काल खंडों में नाम परिवर्तित होता रहा है। कुश स्थली, अवंतिका, उज्जयिनी, उज्जैन सहित अनेक नाम का वर्णन ऐतिहासिक विद्वानों ने संपादित किया है। उज्जैन को धार्मिक टूरिज्म केन्द्र बनाने की संभावनाओं में सबसे आगे ले जाने की जरूरत है। नदी, तालाब, तलैया ऐतिहासिक धरोहरों और रेल, हवाई यात्रा जैसी अनेक संभावनाएं होने के बावजूद निरंतर उज्जैन को टूरिज्म विकास क्षेत्र बनाया जाए। त्रिवेणी जल संगम से लेकर सूर्य मंदिर कालियादेह महल तक के जल स्तर को समान रूप से रखने के लिए कालियादेह महल पर एक डेम बनाकर संपूर्ण इलाके को नौकाविहार के रूप में स्थापित किया जा सकता है। वहीं कालियादेह महल पर भी धार्मिक, आध्यात्मिक, रमणिक एवं ऐतिहासिक संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता है।

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