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दुराचारियों को फाँसी देने का केन्द्र का अध्यादेश ऐतिहासिक : मुख्यमंत्री श्री चौहान

 भोपाल : शनिवार, अप्रैल 21, 2018, 20:45 IST मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज केन्द्रीय केबिनेट द्वारा 12 वर्ष से कम उम्र की बेटियों के साथ दुराचार होने पर फाँसी की सजा देने के लिये लाये गये अध्यादेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐतिहासिक फैसला बताया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस कड़े फैसले के लिये प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय मंत्रीमंडल को धन्यवाद दिया।श्री चौहान ने कहा कि इस संवेदनशील विषय पर मध्यप्रदेश ने भी पहल की थी। पिछले विधानसभा सत्र में एक विधेयक पारित किया गया था जिसमें 12 साल से कम उम्र की बेटी के साथ दुराचार के प्रकरण में फाँसी की सजा का प्रावधान किया था।श्री चौहान ने कहा कि मानव अधिकार केवल मानव के लिये होते हैं। राक्षसों के मानव अधिकार नहीं होते। ऐसे राक्षस जो दूसरे की जिंदगी से खेलते हैं, गरिमा को तार-तार करते हैं और जीवन को नरक बना देते हैं उनको जीने का कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि दुराचारियों को मृत्यु दण्ड देने का जो फैसला केन्द्र ने लिया है उससे अपराधियों में खौफ पैदा होगा। बेटियों के साथ दुराचार करने का विचार आने से पहले वे सौ बार सोचेंगे। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा के लिये ऐसे ही कड़े कदमों की जरूरत थी। इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।इंदौर की घटना पर शोकइंदौर की त्रासदपूर्ण घटना पर शोक व्यक्त करते हुए श्री चौहान ने कहा कि केन्द्र द्वारा लाये गये अध्यादेश के परिप्रेक्ष्य में अब अपराधी को फाँसी देने का फैसला लेना आसान हो जायेगा। इस प्रकरण को संवेदनशील मानते हुए फास्ट ट्रेक कोर्ट में इसकी सुनवाई होगी। यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि अपराधी को जल्द से जल्द फाँसी की सजा मिले।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री चौहान की पहल पर मध्यप्रदेश ने दण्ड विधि (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक -2017 पारित कर राष्ट्रपति की अनुमति के लिये भेजा गया है। इस विधेयक में भी कड़े दण्डात्मक प्रावधान किये गये हैं। इन प्रावधानों के अनुसार जो कोई 12 वर्ष तक की आयु की बेटी के साथ ज्यादती करेगा उसे मृत्युदंड मिलेगा या कम से कम 14 साल तक की कठोर सजा होगी। एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा ज्यादती करने पर मृत्युदंड या 20 वर्ष का कठोर कारावास मिलेगा। शादी का झाँसा देकर ज्यादती करने वाले को तीन साल की सजा मिलेगी और जुर्माना होगा। पीछा करने पर पहली बार में तीन वर्ष की सजा और जुर्माना होगा। दूसरी बार में 7 साल तक की सजा हो सकती है। एक लाख रुपये का जुर्माना होगा। निर्वस्त्र करने पर पहली बार 3 साल से सात साल तक का कारावास। गैर-जमानती अपराध होगा। दूसरी बार में ये सजा 10 साल की कैद और एक लाख जुर्माना का प्रावधान म.प्र. के विधेयक में किया गया है।

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