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वर्ष 2015 का मनीष मीणा हत्याकांड : पत्नी, प्रेमी व साथियों को आजीवन कारावास

उज्जैन। शहर के व्यस्ततम क्षेत्र टावर चौक पर हुई मनीष मीणा की हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए माननीय न्यायाधीश एपीके कुलकर्णी ने आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले में हत्याकांड की साजिश रचने वाली मृतक की पत्नी सहित तीन आरोपियों को सजा से दंडित किया है। जबकि एक और आरोपी को 3 साल की सजा सुनाई है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश उज्जैन के न्यायालय द्वारा आरोपीगण हनीफ पिता अनवर खॉ ( 27) निवासी खंदार मोहल्ला उज्जैन,  रिजवान पिता अब्दुल रईस अंसारी (22) निवासी छोटी खंदार नलिया बाखल उज्जैन, मीनाक्षी पति मनीष मीणा (28) निवासी विवेकानन्द कॉलोनी उज्जैन को धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक अन्य आरोपी इंजमामउद्दीन उर्फ जमाम पिता रफीकउद्दीन (20) निवासी खंदार मोहल्ला नलिया बाखल उज्जैन को धारा 201 भादवि के तहत 7 वर्ष सश्रम कारावास,  धारा 25, 27 आयुध अधिनियम में  3-3 वर्ष का सश्रम कारावास से दण्डित किया गया।
घटना 18 अगस्त 2015 की है। टावर चौक स्थित मनीष मीणा के ऑफिस के नीचे ही हमलावरों ने उसे सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका मृतक की पत्नी मीनाक्षी की रही थी। जांच में पता चला कि मृतक की पत्नी मीनाक्षी, हनीफ खान के साथ एक एनजीओ में कार्य करती थी। इस दौरान दोनों में प्रेम हो गया। प्रेम प्रसंग इतना गंभीर हो गया की पत्नी मीनाक्षी अपने पति मनीष मीणा को रास्ते से हटाने की ठान ली। एक दिन पत्नी मीनाक्षी उसका प्रेमी हनीफ अंबर कॉलोनी में एक कमरे में एक साथ थे। उस समय नीलगंगा पुलिस द्वारा इनको समझा कर छोड़ दिया था। लेकिन हनीफ और मीनाक्षी ने मनीष मीणा को रास्ते से हटाने की ठान ली। जब मृतक मनीष मीणा ऑफिस आने के लिए तैयार हुआ था उसी समय मीनाक्षी ने उसके प्रेमी हनीफ को फोन किया। मीनाक्षी ने अपने प्रेमी को जानकारी दी कि मनीष ऑफिस के लिए निकलने वाले हैं और मैं स्वयं छोडऩे आ रही हूं। हनीफ अपने साथी के साथ बताए हुए स्थान पर पहुंच गया। तभी रिजवान मोटर साइकिल चलाकर पीछे हनीफ को बैठाकर बसाबडा पेट्रोल पम्प के पीछे वाली गली में मनीष मीणा के पीछे-पीछे गया और गली में हनीफ ने देशी पिस्टल से गोली चलाई और मनीष मीणा के सिर में गोली मारकर आरोपीगण गली में सीधे सनसाईन टॉवर की तरफ भाग गये। गोली लगने के 4 दिन तक मनीष मीणा हॉस्पिटल में मौत से लड़ता रहा लेकिन एक दिन मौत से हार गया। मनीष मीणा को खुद ही नहीं पता था कि जिससे वह प्रेम विवाह कर रहा है वही उसकी मौत का कारण बनेगी। 
अनुसंधान के दौरान इंजमामउद्दीन से घटना में प्रयुक्त पिस्टल जप्त की गई थी। आवश्यक अनुसंधान पश्चात् आरोपीगण के विरूद्ध धारा 302,120-बी, 201 भादवि तथा 25, 27 आयुध अधिनियम में अभियोग पत्र माननीय न्यायालय में पेश किया गया। प्रकरण की प्रकृति, जघन्य एवं सनसनीखेज होने से उसकी समीक्षा माननीय संचालक महोदय अभियोजन श्री पुरूषोत्तम शर्मा द्वारा की जा रही थी एवं समय-समय पर पैरवीकर्ता को न्योचित एवं विधिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया था।  प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी श्रीमान राजकुमार नेमा, डी.पी.ओ, एवं श्री सूरज बछेरिया, अति डीपीओ, जिला उज्जैन द्वारा की गई।

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