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उज्जैन को पवित्र नगरी बनाने हेतु साधु संतों ने लिखा खून से पत्र

उज्जैन। मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन को मांस-मदिरा की दुकानों से मुक्त करने हेतु गुरूवार को देवास रोड स्थित एक होटल में संत समाज एकत्रित हुआ। यहां सभी ने एकमत होकर उज्जैन को पवित्र नगरी बनाने की मांग को दोहराते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को खून से लिखा एक पत्र प्रेषित किया। जिसमें मांग की गई कि उज्जैन को पूरी तरह से मांस मदिरा की दुकानों से मुक्त किया जाए। संतजनों का कहना है कि आगे भी यदि उज्जैन को पवित्र नगर घोषित नहीं किया जाता है तो संत समाज आंदोलन की राह पकड़ेगा।
स्वर्णिम भारत मंच द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन रखा गया था। इसमें विभिन्न अखाड़ों से जुड़े साधु-संत शामिल हुए और सभी ने एक स्वर में उज्जैन को पवित्र नगरी बनाने हेतु अपनी हुंकार भरी। बड़ी संख्या में मौजूद साधु संतों से मुंबई से आये महामनाचार्य कुशग्रानंद जी के शिष्य ऊर्जा गुरु अरिहंत ऋषि एवं स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने खून से लिखे पत्र पर हस्ताक्षर करवाए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ऊर्जा गुरू अरिहंत ऋषि ने कहा कि सभी साधु संतों के सहयोग से ही उज्जैन को मांस-मदिरा की दुकानों से मुक्त कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म के मंदिरों में प्रशासन के अधिकारी बैठे है, जबकि किसी मस्जिद या चर्च में अधिकारी नहीं पहुंच पाते हैं। केवल हिंदू धर्म के धर्म स्थलों पर ही प्रशासन के नुमाइंदों ने कब्जा जमाया हुआ है। स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने संत समाज को संबोधित करते हुए कहा कि यदि संत समाज एक होकर प्रतिकार करे तो उज्जैन को पवित्र नगरी बनने से कोई रोक नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि राम जन्म भूमि पर मस्जिद बना दी और हमारे आराध्य भगवान श्रीराम टेंट में बैठे हैं। उन्होंने कहा कि साधु संतों को सनातन धर्म की रक्षा के लिए एक होना पड़ेगा। यदि एक हो गए तो संतों की आवाज को कोई भी दबा नहीं सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सत्ता किसी भी दल के हाथ में हो हमारा उद्देश्य केवल उज्जैन को पवित्र नगरी बनाना और मांस-मदिरा की दुकानों को यहां से हटाना भर है। इस अवसर पर समस्त साधु संतों ने खून से लिखे पत्र में अपने हस्ताक्षर किए और उज्जैन को पवित्र नगरी बनाने की मांग की। इस अवसर पर निर्वाणी अखाड़े के मंहत दिग्विजयदास महाराज, स्वर्णिम भारत मंच के दिनेश श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संतजन मौजूद थे।

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