ब्रेकिंग न्यूज
logo
add image
Blog single photo

धर्मनिष्ठ और अधिवक्ता जब एकजुट होंगे तो हिन्दुआें को वास्तविक रूप में न्याय मिलेगा -डॉ. पिंगळे

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु नई दिल्ली में  ‘अधिवक्ता अधिवेशन’ संपन्न !
नई दिल्ली -  २१ सितंबर के शुभ दिन उत्तर भारत हिन्दू अधिवेशन अंतर्गत ‘अधिवक्ता अधिवेशन’ का प्रारंभ दिल्ली के भारत सेवाश्रम संघ के आत्मज्ञानानंद महाराजजी, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारूदत्त पिंगळे, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, अधिवक्ता रविशंकर कुमार तथा अधिवक्ता  आर. व्यंकटरमणि के हस्तों से दीपप्रज्वलन कर किया गया । 
हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारूदत्त पिंगळे ने उपस्थित अधिवक्ताआें को संबोधित कर कहा कि, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य दैवी कार्य है । अधिवक्ता कानून को जानते हैं, तथा उसकी मर्यादाआें को भी जानते है । वह कानून की उपयुक्त शक्ति का उपयोग कर हिन्दुआें की सहायता कर सकते हैं ।  आपराधिक पार्श्‍वभूमि से आने वाले सांसद लोकसभा मे जो कानून हमारे लिए बनाएंगे क्या वह जनहितकारी होगा ? धर्म की व्याख्या से कानून का उद्देश्य है - धर्म की रक्षा करना, व्यक्ति की रक्षा करना । किंतु आज कानून बनाए जाते हैं, मत पाने के लिए । उसका एक उद्ाहरण है, कर्नाटक में तत्कालीन भाजपा सरकारने गोहत्या प्रतिबंधक कानून बनाया, बाद में कांग्रेस ने सत्ता मे आते ही उसे रद्द कर दिया । 

हम कानूनी मार्ग से दबाव बनाकर सरकार के समक्ष अपनी मांगें रख सकते हैं । हिन्दू जनजागृति समिति ने सूचना के अधिकार का उपयोग कर कई मंदिरों के, राजनेताआें के भ्रष्टाचार को उजागर किया है । तथा जनहित याचिकाए भी दाखिल की । इसलिए हिन्दू जनजागृति समिति तथा सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने हेतु भ्रष्टाचारी दांव पेंच लडा रहे हैं । जब अल्पसंख्यंकों के संगठित प्रयास के समक्ष शासन झुकता है, तब हिन्दुआें के एकजुट प्रयास के समक्ष भी सरकार को झुककर हमारी मांगे माननी ही होंगी । धर्मनिष्ठ और अधिवक्ता जब एकजुट होंगे तो हिन्दुआें को  वास्तविक रूप में न्याय मिलेगा  ।
 
सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता  आर. व्यंकटरमणिजी ने अपने वक्तव्य मे भारत मे चल रहे छद्म सेक्युलरवाद, तथा धर्मपरिवर्तन के षडयंत्र के संदर्भ में मार्गदर्शन किया ।

जम्मू-कश्मीर में रोशनी एक्ट - कानूनद्वारा जिहाद का उदाहरण-
जम्मू से आए अधिवक्ता अंकुर शर्माजीने अधिवेशन में अपना मनोगत व्यक्त करते हुए बताया कि, आज भारत की व्यवस्था में ही घुसपैठ हो चुकी है और वह भारत के हित में कोई भी निर्णय लागू करने का विरोध कर रहे हैं । इसका सबसे बडा उदाहरण है कि, भारत में बनाए टाडा जैसे कठोर आतंकवादी कानून का बडी मात्रा मे विरोध कर लागू नहीं होने दिया गया । इसका लाभ आतंकवादियों को हुआ । विश्‍व के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत आतंकवाद से सबसे प्रभावित देश होते हुए भी भारत का आतंकवाद नियंत्रण कानून विश्‍व में सबसे दुर्बल है । नेेहरू ने जम्मू कश्मीर का संविधान बनाते समय शेख अब्दुला को विश्‍वास दिलाया कि जम्मू कश्मीर की संविधान सभा में केवल मुस्लिम ही आऐंगे, इस कारण से वहां संविधान में ही मुस्लिम हितों को प्राथमिकता दे दी गयी । तब फिर हिन्दुआें को न्याय कैसे  मिल सकता है ।  
अब इसी संविधान के आधार पर जम्मू कश्मीर में विभिन्न सरकारों ने मुस्लिमहित साधनेवाले कानून बनाकर सरकारी स्तर पर जिहाद को सहायता की । ‘रोशनी एक्ट’ उसी का एक उदाहरण है । सरकार ने इस कानून के द्वारा जम्मू क्षेत्र में मुसलमानों ने वनविभाग की तथा अन्य सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किया था, वह सारी जमीन उनके नाम कर दी जाएगी और इसके बदले मे उनके द्वारा कर (टैक्स) लेकर उससे राज्य मे बिजली योजना की जाएगी ।  इस कानून का लाभ उठाकर राज्य की सरकारी तथा हिन्दुआें की भूमि मुसलमानों ने हथिया ली । ‘कैग’ के रिपोर्ट मे कहा गया कि, उस जमीन का मूल्य उस समय पे २५ हजार करोड थी ।  इसी भूमि पर बाहर से आए मुसलमानों को बुलाकर बसाया गया । इस विषय पर हमने जनहित याचिका करने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सरकारी आदेश निकालकर सभी जिला मजिस्ट्रेट और तहसीलदारों को आदेश दिया कि, हिन्दूबहुल क्षेत्रों में यदि मुस्लिमों ने उनकी भूमि पर कब्जा किया तो उन्हे वहां से हटाया न जाए  । आज जनहित याचिकाद्वारा इस विषय मे जम्मू कश्मीर सरकार से लडाई चालू है ।
इस अधिवेशन में सर्वोच्च न्यायलय के अधिवक्ता हरि शंकर जैनजी, अधिवक्ता रविशंकर कुमारजी, अधिवक्ता विष्णु हरि जैनजी, अधिवक्ता (श्रीमती) संगीता चौहान तथा उच्च न्यायालय की अधिवक्ता (श्रीमती) अमिता सचदेवा, भोपाल से सनातन अधिवक्ता संघ के ८ अधिवक्ता तथा अन्य अधिवक्ता सम्मिलित हुए । इस कार्यक्रम में ‘व्यवस्था परिवर्तन के लिए कार्य’ विषय पर परिसंवाद सत्र हुआ, ‘हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु अधिवक्ताआें का योगदान’ विषय पर गुटचर्चा हुई तथा तनावमुक्ति के लिए साधना करने की आवश्यकता विषय पर मार्गदर्शन किया गया ।

ताजा टिप्पणी

टिप्पणी करे

Top