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महाकाल भक्तों के लिए 17 जुलाई से करेंगे संघर्ष का शंखनाद

14 जुलाई को मुख्यमंत्री से मिलकर बताएंगे भक्तों की पीड़ा-भस्मारती में गंदी सड़कों पर बैठकर ठंड, बारिश में बच्चे, बूढ़े, महिलाएं घंटों करती है पट खुलने का इंतजार
उज्जैन। देश के आईकॉन महाकालेश्वर मंदिर की भस्मारती मे शामिल होने के लिये देशभर से आने वाले दर्शनार्थियों को अंधेरी रात में खुले आसमान के नीचे गंदी सड़क पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। परिवार के साथ आने वाले दर्शनार्थी इस अव्यवस्था से खासे नाराज होकर जाते हैं। बाबा महाकाल के दरबार में देश भर से आ रहे श्रध्दालुओं को हो रही घोर असुविधा के विरोध में 17 जूलाई से संघर्ष का शंखनाद किया जाएगा। जिसके तहत धरना प्रदर्शन, भूख हड़ताल देवास गेट चौराहा पर की जाएगी। इसके पूर्व जन आशीर्वाद यात्रा का शुभारंभ करने 14 जुलाई को उज्जैन रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को भी श्रध्दालुओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार से अवगत कराया जायेगा।
महाकाल भक्त मंडल अध्यक्ष अरूण वर्मा के अनुसार मंदिर प्रशासन की बद इंतजामी पर श्रध्दालूओ का कहना है कि हमें नहीं पता था कि हजारों किलोमीटर की यात्रा कर उज्जैन पहुंचने के बाद गंदी सडक पर बैठना पडेगा। देश के किसी भी मंदीर या तीर्थस्थान पर इस प्रकार की बदइंतजामी नही है। अरूण वर्मा ने कहा कि हमें अपने उज्जैन मध्य प्रदेश की वह अतिथि देवो भवः की छवि बनानी है जिसमें देश भर से पधारे भगवान महाकाल बाबा के भक्त एक सुखद अनुभति लेकर शहर से विदा ले। पर महाकाल मंदिर प्रबंध समिती की निगरानी में उलटा हो रहा है सुबह से कई बार लाईन मे लगकर 10 घंटे की मशक्त के बाद में भस्मारती की परमीशन होती है फिर रात्रि 11 बजे से 3-4 घण्टे लगने वाली कतार मे खडे या गंदी सड़क पर बैठकर इंतजार करना पडता है। देश भर से आये भक्तों को ठंड, बारिश जैसे विकट मौसम में भी इस तरह पट खुलने के इंतजार में 3-4 घण्टे सड़क पर बैठना पड़ता है। बारिश हो जाये तो भीगते हुए खडे़ खडे़ ही इंतजार करते है। बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं को इस कारण काफी असुविधा होती है पर महाकाल भस्मारती के दर्शन का उत्साह ज्यादा बड़ा होता है। पर हमें चाहिये की घोर परेशानियों से निजात हो और उज्जैन से विदा हर श्रध्दालू खुशी खुशी जाये। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की व्यवस्थाओं की गौरव गाथा गाता रहे। इसलिए एक बार प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष भक्तों की दुर्दशा बयां करने के बाद 17 जुलाई से बाबा महाकाल के भक्तों को परेशानियों से निजात दिलाने हेतु आंदोलन किया जाएगा।

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