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किसानों के नाम आंदोलन कांग्रेस की टिकिटबाजी की भीड़

उज्जैन। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य सुरेन्द्र सांखला ने मंदसौर में पिछले वर्ष कथित संघर्ष में मारे गए किसान के नाम पर इकट्ठा हुए लोग किसान कम कांग्रेस की विधानसभा के दावेदार थे  जो कि पूरे प्रदेश से बुलाए गए थे। ऐसा कृत्य किसानों की आड़ में कांग्रेस का अस्तित्व बचाओ आंदोलन है।

सुरेन्द्र सांखला ने दावा किया कि पूरे मध्यप्रदेश में कांग्रेस का किसानों के नाम पर किया गया आंदोलन महज एक नौटंकी है। कांग्रेस किसानों के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है। कांग्रेस को किसानों से कोई सरोकार नहीं है। अगर किसानों को कांग्रेस वाकई में सक्षम बनाना चाहती तो वह दिग्विजयसिंह के 10 वर्ष के कार्यकाल में जो आज प्रदेश में सक्षम कृषि हुई है वैसी कृषि बढ़ाई जा सकती थी। लेकिन किसान पूरे देश में मनमोहनसिंह की सरकार में कहीं गन्ने के भाव को, तो कहीं सोयाबीन, चना और अन्य दलहन, तिलहन के भाव और महंगी कृषि को करते हुए परेशान रहा है। यहां तक कि किसानों को रासायनिक खाद भी कांग्रेस सरकार उपलब्ध कराने में अक्षम रही थी। कृषि बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, गांव, गरीब, खलिहान का विकास भाजपा की अटल सरकार या फिर अब मोदी सरकार कर रही है।

सुरेन्द्र सांखला ने कहा कि मध्य प्रदेश की कृषि का रकबा यूं ही महज बढ़ गया है। इसके लिए गांव का विकास कृषि में लाभ का धंधा बनाने का विजन होने से बिजली आपूर्ति कृषि, जल प्रबंधन, कृषि जौत उपकरण, खाद बीज की उपलब्धता एवं विपणन व्यवस्था का सुदृढि़करण सहित कृषि को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने से हुआ है। उद्यानिकी के क्षेत्र में किसानों को दोहरा लाभ मिला है। दूध की उपलब्धता से अधिक किसानों ने दूध उत्पादन करके दिखाया है। कांग्रेस महज चुनाव के वक्त सामने आकर किसानों को ढाल बना रही है। इससे कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर हो गया है। कांग्रेस का आंदोलन किसानों ने नकार दिया है।

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