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सूर्य रत्न "माणिक्य" बदल सकता हैं आपका भाग्य

जानिए सूर्य रत्न माणिक्य (रूबी) को, कब,क्यों और कैसे करें धारण रूबी रत्न को
वैदिक ज्योतिष के अनुसार माणिक्य रत्न, सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है!  इस रत्न पर सूर्य का स्वामित्व है! यह लाल या हलके गुलाबी रंग का होता है! यह एक मुल्वान रत्न होता है, यदि जातक की कुंडली में सूर्य शुभ प्रभाव में होता है तो माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए, इसके धारण करने से धारण करता को अच्छे स्वास्थ्य के साथ साथ पद-प्रतिष्ठा, अधिकारीयों से लाभ प्राप्त होता है! शत्रु से सुरक्षा, ऋण मुक्ति, एवं आत्म स्वतंत्रता प्रदान होती है! ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि माणिक्य एक भहुमुल्य रत्न है और यह उच्च कोटि का मान-सम्मान एवम पद की प्राप्ति करवाता है! सत्ता और राजनीती से जुड़े लोगो को माणिक्य अवश्य धारण करना चाहिए क्योकि यह रत्न सत्ता धारियों को एक उचे पद तक पहुचाने में बहुत सहायता कर सकता है!
माणिक को अंग्रेजी में रूबी कहते हैं। इसे सभी रत्‍नों में सबसे श्रेष्‍ठ माना जाता है। लाल रंग का माणिक सबसे बेहतरीन और मूल्‍यवान होता है। विभिन्‍न जगहों में पाए जाने के कारण जलवायु परिवर्तन का असर इसके रंगों में भी दिखता है। लाल से गुलाबी तक यह कई अलग-अलग जगहों में अलग-अलग रंगों में निकलता है। माणिक्य को माणक भी कहा जाता है. यह एक अति मूल्यवान रत्न है. संस्कृ्त भाषा में इसे लोहित, पद्यराग, शोणरत्न , रविरत्न, शोणोपल, वसुरत्न, कुरुविंद आदि नामों से जाना जाता है. हिन्दी - पंजाबी में चुन्नी, उर्दू- फारसी में याकत व अंग्रेज़ी में ये रुबी के नाम से प्रचलित है. यह लाल रक्तकमल जैसे सिंदूरी, हल्के नीले आदि रंगों में पाया जाता है . असली व निर्दोष माणिक्य हल्की नीले आभा वाला होता है, जिससे लाल रंग की किरणें निकलती हैं . इन्हीं सब विशेषताओं के चलते इसे सूर्यरत्न भी कहा जाता है.
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की वर्तमान हालत में  हर व्यक्ति रत्नों के चमत्कारी प्रभावों का लाभ उठा कर अपने जीवन को समृ्द्धिशाली व खुशहाल बनाना चाहता है. रत्न भाग्योन्नति में शीघ्रातिशीघ्र अपना असर दिखाते हैं. रत्न समृ्द्धि व ऎश्वर्य के भी प्रतीक होते हैं. अत: इनकी चमक हर व्यक्ति को अपने मोहपाश में बाँध अपनी ओर आकर्षित करती है. ज्योतिष शास्त्र के साथ -साथ चिकित्सीय जगत में भी रत्नों के प्रभावशाली लाभों को मान्यता प्राप्त है. ऐसे में प्रमुख नवरत्नों की यदि बात करें तो हर रत्न की अपनी अलग विशेषता है. नवरत्न जैसे माणिक्य, हीरा, पन्ना , मोती, मूंगा, गोमेद, पुखराज, नीमल, लहसुनिया सभी रत्नों में भिन्न-भिन्न गुण विद्यमान हैं व हर रत्न की अपनी अलग उपयोगिता है . परंतु यदि हम इनमें से माणिक्य की बात करें तो यह एक बेहद खूबसूरत व बहुमूल्य रत्न होने के साथ - साथ अनेकों प्रभावशाली गुणों से भी युक्त है . माणिक्य रत्न जड़ित आभूषण हर उम्र के लोगों के व्यक्तित्व में चार- चाँद तो लगाते ही हैं , साथ ही साथ भीड़ से अलग एक बेहतरीन व राजसी लुक भी प्रदान करते हैं .
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि सूर्य एक ऊर्जावान ग्रह है अतः धारक को सूर्य ऊर्जा मुफ्त में ही प्राप्त होती रहती है। सूर्य सिंह राशि का स्वामी होता है अतः माणिक धारण करने से व्यक्ति आत्मनिर्भर भी बनता है। वर्चस्व की क्षमता भी बढ़ती है, मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्तियां भी बढ़ती हैं, अस्थिरता नष्ट होकर स्थिरता प्राप्त होती है, आत्मोन्नति एवं संतान सुख भी बढ़ता है।  यह ध्यान रखना आवश्यक है कि माणिक लग्न, दशा तथा ग्रह-गोचर का अध्ययन करके ही धारण करें। इस रत्न के साथ कभी भी हीरा, गोमेद एवं नीलम नहीं पहनना चाहिए। अच्छा माणिक आभायुक्त चमकदार होता है, हाथ में पकड़ने पर भारी लगेगा और हल्की-हल्की गर्मी महसूस होगी। माणिक रक्तवर्धक, वायुनाशक और पेट रोगों में लाभकारी सिद्ध होता है। यह मानसिक रोग एवं नेत्र रोग में भी फायदा करता है। माणिक धारण करने से नपुंसकता नष्ट होती है।
यदि अंक ज्योतिष की बात करें तो जिन व्यक्तियों का जन्म किसी भी माह की 01, 10, 19, 28 तारीख को हुआ हो वे माणिक्य धारण कर अनेकों प्रकार से लाभान्वित हो सकते हैं |

कौन करे धारण:-
सिंह राशि के जातक इस अभिमंत्रित माणिक्‍य की अंगूठी को धारण कर सकते हैं।
कौन होते हैं सिंह राशि के जातक:-
अगर आपका जन्‍म 21 जुलाई से 20 अगस्त के बीच हुआ हो या आपका नाम मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे  में से किसी एक अक्षर से शुरू होता है तो आपकी राशि सिंह है।
सूर्य रत्न माणिक्य द्वारा रोगोपचार:-
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार माणिक्य रक्त संबंधी विकारों के लिए बेहद लाभदायक होता है. साथ ही यह क्षय रोग, उदर शूल , फोड़ा, धातु, विषनाश, आँखों की बिमारी एवं कोष्ठबद्धता में अत्यंत कारगर सिद्ध होता है|माणिक्य रत्न अपने चिकित्सिय गुणों के कारण भी प्रसिद्ध हैं। यह माना जाता हैं कि माणिक्य रत्न को विशेषा परिस्थितियों में रक्त प्रवाह के संतुलन के लिए धारण किया जाता हैं। सेहत की कमी से जूझ रहें व्यक्तियों के लिए यह रत्न उपयोगी साबित होता हैं। पित्त रोगों के निवारण में रुबि रत्न लाभ देता हैं। वायुनाशक, उदररोग, तपेदिक आदि रोगों से रोगमुक्त होने के लिए माणिक्य रत्न पहनाजा सकता हैं। यह रत्न अपने धारक को इन सभी रोगों से निजात देने में सहयोगी रहता हैं। इसके अतिरित यह रत्न ह्रदय से जुड़े रोग, रक्तचाप, दिल की असंतुलित धड़कनों पर नियंत्रण, व्यर्थ की बेचैनी, आंखों के रोग, कैंसर और अपेण्डीसाइटिस आदि रोगों में कमी करने के लिए भी धारण किया जाता हैं। यह भी माना जाता हैं कि शारीरिक दुर्बलता, आत्मविश्वास, हड्डी से संबंधित परेशानियां, मधुमेह, ज्वर, फेफड़े की बीमारियां और मधुमेह के रोग के निवारण के लिए भी रुबी रत्न पहनना चाहिए। इन रोगों के उपचार के लिए इसकी भस्म इस्तेमाल की जाती है . साथ ही इसकी गोलियाँ भी बाज़ार में उपलब्ध हैं परंतु इनके सेवन से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य से सलाह अवश्य लें.

माणिक रत्न की प्राकृतिक उपलब्‍धता
माणिक खनिज के रूप में सबसे ज्‍यादा म्‍यांमार में पाया जाता है। यहां सबसे उच्‍च कोटि का माणिक पाया जाता है। पहले म्‍यांमार के ऊपरी भाग में इसकी ज्‍यादा खदानें थी लेकिन फिर 1990 के बाद मध्‍य म्‍यांमार में माणिक की ज्‍यादा खाने मिलने लगीं। यहां का माणिक इतना लाल होता है कि उसके रंग को ‘कबूतर के खून’ की संख्‍या दी जाती है।
बर्मा से प्राप्त माणिक्य का रंग और जगह से प्राप्त माणिक्य से कम गहरा होता है ।।
श्री लंका से प्राप्त माणिक्य के रंगों में कुछ पीलापन होता है । सबसे उत्तम जाति के माणिक्य उत्तरी बर्मा के मोगोल नामक स्थान से प्राप्त होते है ।।
म्‍यांमार के अलावा भी यह रत्‍न नेपाल, कंबोडिया, भारत, अफगानिस्‍तान, ऑस्‍ट्रेलिया, नमीबिया, कोलंबिया, जापान, स्‍कॉटलैंड, ब्राजील और पाकिस्‍तान में भी पाया जाता है। इसके अलावा श्रीलंका में भी माणिक की खाने पाई जाती हैं लेकिन यहां का माणिक सबसे निम्‍न होता है, जिसका रंग गुलाबी होता है। कई माणिक हल्के लाल, सिंदूरी लालिमा लिए होते है. आम मान्यता है असली माणिक को हथेली पर रखने से उष्णता का अनुभव होता है. चांदी के पात्र में मोतियों के बीच यदि असली माणिक रख दिया जाये तो, मोतोयों का रंग कुछ लालिमा लिए हुए दिखता है. असली और शुद्धमाणिक कान्तियुक्त, चिकना, कनेर के पुष्प सदृश लाल और भारी पण लिए होता है. जिस माणिक में कुछ दाग, धारियां, कुछ चिन्ह हो, काँटी हीन हो, ऐसा माणिक दोषपूर्ण माना गया है.
विज्ञान और माणिक रत्न:-
वैज्ञानिक दृष्‍टि में रूबी एल्‍फा-एल्‍यूमिना है जोकि एल्‍यू‍मीनियम ऑक्‍साइड की सबसे स्‍थि‍र अवस्‍था है। इसका वैज्ञानिक फार्मुला Al2O3.Cr होता है। यह एक खनिज है और इस‍की संरचना में क्रोमियम के साथ एल्‍यूमिनीयम ऑक्‍साइड के कई अणु एक दूसरे से जुड़े होते हैं। फोटो रसायनिक अध्‍ययन से यह सिद्ध हुआ है कि माणिक संतरी लाल और बैंगनी लाल आभा बिखेरता है।
आर्टिफीशियल माणिक-
वर्ष 1837 में ही कृत्रिम रूप से माणिक बना लिया गया था। सबसे पहले इसे फिटकरी को उच्‍च तापमान पर गर्म करके क्रोमियम के साथ मिलाकर तैयार किया गया था। इसके बाद रसायन शास्‍त्रियों ने कई दूसरे और सस्‍ते तरीके आर्टि‍फीशियल माणिक बनाने के लिए इजाद कर लिए। लेकिन कॉमरशियली इसका उत्‍पादन 1903 में शुरू हुआ। माणिक बनाने वाली पहली फैक्‍ट्री में 30 भट्टि‍यां बनाई गई थी, जिसमें पूरे वर्ष में 1000 किलोग्राम माणिक तैयार किया जाता था।
माणिक रत्न के गुण:-
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि माणिक बहुत चमकदार गहरे लाल रंग से गुलाबी रंग तक होता है। गहरा लाल रंग होने के बाद भी यह रत्‍न ट्रांस्‍पेरेंट होता है। ऐसा कहा जाता है कि इसे हाथ में लेकर रखने से गर्मी का एहसास होने लगता है।
माणिक्‍य सूर्य का रत्‍न है। इसको धारण करने के संबंध में कुंडली में सूर्य की स्‍थ‍िति को देखा जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि बेहतर होता है कि किसी जानकार ज्‍योतिषाचार्य की सलाह लेने के बाद ही माणिक्‍य धारण करें किन्‍तु यहां कुंडली में सूर्य की उपस्थिति के अनुसार माणिक्‍य धारण करने के विषय में सामान्‍य बिन्‍दु प्रस्‍तुत किए जा रहे हैं---
यदि किसी जातक की कुंडली में दूसरे भाव में सूर्य धन प्राप्‍ति में बाधा उत्‍पन्‍न करता है या जातक की नौकरी और कारोबार में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न होता है, तो इस स्थिति में माणिक्‍य धारण करना लाभदायक माना जाता .
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि जिन जातकों की कुंडली में तीसरे भाव में सूर्य होता है तो यह उसके छोटे भाई के लिए खतरा उत्‍पन्‍न करता है. ऐसे लोगों के छोटे भाई अक्‍सर नहीं होते हैं या फिर मृत्‍यु हो जाती है. सूर्य की इस स्थिति में भी माणिक्‍य धारण करना उचित रहता है.
सूर्य लग्‍न में हो तो सूर्य का तेज कई प्रकार से बाधाएं देता है। इनमें संतान से संबंधि‍त समस्‍या प्रमुख है। तथा स्‍त्री के लिए भी यह कष्‍टदायक होता है। ऐसे लोगों को माणिक कदापि नहीं धारण करना चाहिए।
दूसरे भाव में सूर्य धन प्राप्‍ति में बाधा उत्‍पन्‍न करता है। जातक की नौकरी और कारोबार में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न होता है। इस स्थिति में माणिक्‍य धारण करना लाभदायक माना जाता है। माणिक्‍य सूर्य के प्रभाव को शुद्ध करता है और जातक धन आदि की अच्‍छी प्राप्‍ति कर पाता है।
तीसरे भाव में सूर्य का होना छोटे भाई के लिए खतरा उत्‍पन्‍न करता है। ऐसे लोगों के छोटे भाई अक्‍सर नहीं होते हैं या फिर मृत्‍यु हो जाती है। सूर्य की इस स्थिति में भी माणिक्‍य धारण करना उचित रहता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि चौथे भाव में सूर्य नौकरी, ऐशो-आराम आदि में बाधाएं उत्‍पन्‍न करता है। ऐसी स्थिति में भी माणिक्‍य धारण किया जा सकता है।
पांचवें भाव में सूर्य हो तो अत्‍यधिक लाभ व उन्‍नति के लिए माणिक्‍य पहनना चाहिए।
यदि सूर्य भाग्‍येश और धनेश होकर छठे अथवा आठवें स्‍थान पर हो तो माणिक्‍य धारण करना लाभ देता है।
यदि सूर्य सप्‍तम भाव में हो तो वह स्‍वास्‍थ्‍य संबंधि परेशानियां देता है। ऐसे लोग माणिक्‍य पहनकर स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार महसूस करते हैं।
सूर्य अष्‍टमेश या षष्‍ठेश हो कर पाचवें अथवा नवे भाव में बैठा हो तो जातक को माणिक्‍य धारण करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि अगर जन्‍मकुंडली में सूर्य अपने ही भाव अर्थात अष्‍टम में हो तो ऐसे लोगों को अविलंब माणिक्‍य धारण करना चाहिए।
ग्‍यारवें भाव में स्थि‍त सूर्य पूत्रों के विषय में चिंता देता है साथ ही बड़े भाई के लिए भी हानिकारक होता है। ऐसे व्‍यक्‍तियों को भी माणिक्‍य धारण कर लेना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि सूर्य बारहवें भाव में हो तो वह आंखों के लिए समस्‍याएं उत्‍पन्‍न करता है। अत: नेत्रों को सुरक्षित रखने हेतु माणिक्‍य धारण करना बेहतर होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार माणिक कायरता को दूर करने में मदद करता है ऐसे व्यक्तियों के लिए जो स्वयं को सुनने में मुश्किल पाते हैं, उनके लिए माणिक एक शानदार रत्न है।
माणिक पत्थर (Ruby stone) उन जोड़ों से पहना जाना चाहिए, जिन्हे अपने रिश्ते को बनाये रखना मुश्किल लग रहा हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसारमाणिक रत्न पहने हुए व्यक्ति को उनके जीवन में नाम, प्रसिद्धि, लोकप्रियता प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। माणिक रत्न निजी जीवन में रचनात्मकता और आत्मविश्वास उत्पन्न करता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यह रत्न उन व्यक्तियों की मदद करता है जो इंजीनियरिंग, मेडिकल, भूविज्ञानी, वकील, नेताओं, कपड़ा व्यापारी, स्टॉक दलाल क्षेत्र में काम करते हैं।
माणिक्य के बारे में कहा जाता है कि यह पत्थर पहनने से सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिलता है, जो संबंधों में खुशी, प्रेम और सद्भाव को बढ़ाता है।
व् जो व्यक्ति व्यवसायिक समस्याओं का सामना कर रहे है, उन्हें इस पत्थर को पहनना चाहिए क्योंकि यह इस पत्थर के बारे में कहा जाता है कि इस रत्न को पहनने से जीवन में भाग्य और धन आमंत्रित होता है।
यह कम रक्तचाप, अनियमित दिल की धड़कन या ध्रुमपान, पक्षाघात और सामान्य दुर्बलता का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यह रत्न राजनीति और जो उच्च कार्यालय या उच्च पदों में सफलता प्राप्त करने के लिए पहना जाता है।
यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य भाग्‍येश और धनेश होकर छठे अथवा आठवें स्‍थान पर हो तो माणिक्‍य धारण करना लाभ देता है.
यदि किसी जातक की जन्‍मकुंडली में सूर्य अपने ही भाव अर्थात अष्‍टम में हो तो ऐसे लोगों को अविलंब माणिक्‍य धारण करना चाहिए.
पांचवें भाव में सूर्य हो तो अत्‍यधिक लाभ व उन्‍नति के लिए माणिक्‍य पहनना चाहिए.
राषि के अनुसार उपयुक्तता -
मेष लग्न में सूर्य पंचम त्रिकोण का स्वामी है और लग्नेष मंगल का मित्र है। अतः मेष लग्न के जातक बुद्धि बल प्राप्त करने, आत्मोन्नति के लिये तथा सन्तान सुख, प्रसिद्धि, राज्य कृपा के लिये माणिक्य धारण कर सकते हैं।
वृषभ लग्न की कुण्डली में सूर्य चतुर्थ केन्द्र का स्वामी है, परन्तु सूर्य लग्नेष शुक्र का शत्रु है। इसलिये इस लग्न के जातकों को माणिक्य नही धारण करना चाहिये।
मिथुन लग्न की कुण्डली में सूर्य तृतीय भाव का स्वामी होगा। अतः जातक सूर्य की दशा समय में माणिक्य धारण कर सकते हैं।
कर्क लग्न में सूर्य की महादषा में माणिक्य विषेष परिस्थिती में शुभ फल दायक होगा।
सिंह लग्न के लिये माणिक्य अत्यन्त शुभ फलदायक रत्न है। इस लग्न के जातकों को आजीवन माणिक्य धारण करना चाहिये। इसके धारण करने से जातक शत्रुओं के मध्य में निर्भय होकर रह सकता है। और शत्रु पक्ष से उनके विरूद्ध जो भी कार्यवाही होगी उससे उनकी बराबर रक्षा होती रहेगी।
यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करेगा। और आयु में वृद्धि होगी। इस लग्न के जातक अत्यन्त भावुक होते हैं। अतः अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखने तथा आत्मबल की उन्नति के लिए सदा माणिक्य धारण करना चाहिये।
कन्या लग्न में सूर्य द्वादष का स्वामी होता है। इस लग्न के जातक को माणिक्य कभी नहीं धारण करना चाहिये।
तुला लग्न की कुण्डली में सूर्य जो लग्नेष शुक्र का शत्रु है, एकादष (लाभ) भाव का स्वामी होता है। इस लग्न के जातक को माणिक्य केवल सूर्य की महादषा में धारण करना शुभ फलदायक होगा।
वृष्चिक लग्न में सूर्य दषम भाव का स्वामी होता है। यहाँ सूर्य लग्नेष का मित्र होता है। अतः राज्य कृपा, प्रतिष्ठा प्राप्ति, मान-सम्मान, व्यवसाय या नौकरी में उन्नति के लिये माणिक्य धारण करना शुभ होगा।
धनु लग्न में सूर्य नवम (भाग्य) भाव का स्वामी होता है। यहाँ भी वह, लग्नेष का मित्र है। अतः धनु लग्न के जातक माणिक्य भाग्योन्नति, आत्मोन्नति तथा पितृ सुख के लिये आवष्यकतानुसार धारण कर सकते हैं। सूर्य की महादषा में माणिक्य विशेष रूप से शुभ होगा।
मकर लग्न के लिये सूर्य अष्टम भाव का स्वामी होता है। इसका लग्नेष शनि और सूर्य में परस्पर शत्रुता है। अतः इस लग्न के जातक को माणिक्य कभी नहीं धारण करना चाहिये।
कुम्भ लग्न में सूर्य सप्तम भाव का स्वामी होता है जो भाव विषेष रूप से मारक स्थान है और क्योंकि सूर्य मारकेष होकर लग्नेष का शत्रु है। अतः हम इस लग्न के जातको को माणिक्य से दूर ही रहने की सलाह देगें।
मीन लग्न के जातकों को भी माणिक्य धारण करना उचित न होगा। क्योंकि इस लग्न में सूर्य षष्ठ भाव का स्वामी होता है। इस लग्न में एक अपवाद हो सकता है क्योंकि सूर्य लग्नेष बृहस्पति का मित्र है। अतः यदि वह षष्ठ का स्वामी होकर षष्ठ भाव ही में स्थित हो तो सूर्य की महादषा में माणिक्य धारण किया जा सकता है।
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कैसे करें असली माणिक्य की पहचान --
प्राप्ति स्थान के अनुसार माणिक्य लाल, गुलाबी, रक्तवर्णी, फिका गुलाबी इत्यादि रंगों में पाया जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि दूध में असली माणिक्य रखने पर दूध का रंग गुलाबी दिखाई देता है। कांच के बरतन में इसे रखने से बरतन के चारों ओर हल्की किरण निकलती दिखाई देती है। माणिक्य का लाल रंग की आभा लिये होता है। यह अन्य रंगों जैसे गुलाबी, काला और नीले रंग में भी पाया जाता है तथा यह अत्यंत कड़क होता है । पृथ्वी पर पाये जाने वाले खनिजों में सिर्फ हीरा ही इससे कठोर होता है । जिस माणिक्य पर सूर्य की पहली किरण पड़ते ही लाल रंग बिखेरने लगे वह सर्वोत्तम माना जाता है । उत्तम माणिक्य की पहचान है कि अगर इसे दूध में 100 बार डुबोते हैं तो दूध मे भी माणिक्य की आभा दिखने लगती है । अंधेरे कमरे में रखने पर यह सूर्य के समान प्रकाशमान होता है । इसे पत्थर पर रगड़े तो इस पर घर्षण के निशान आ जाते हैं लेकिन वजन में कमी नहीं आती है ।।
विद्यार्थियों के लिए होता हैं लाभदायक
नौकरी पेशा लोगों के साथ ही माणिक्य छात्रों के लिए भी लाभ दायक है। बताया जाता है कि इसे धारण करने बाद पढ़ाई में भी मन लगने लगता है या फिर परिस्थिति ऐसी बनती चली जाती हैं कि विद्यार्थी अपने आप ही पढ़ने के लिए आकर्षिक हो जाता है। हालांकि इसे धारण करने से पूर्व किसी ज्योतिष की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
जानिए माणिक्य धारण करने की विधि---(माणिक्‍य रत्न का प्रयोग कैसे और कब करें)
कम से कम 2.5 रत्‍ती माणिक्‍य धारण करना चाहिए। किन्‍तु यदि संभव हो तो 5 रत्‍ती ही धारण करें। इसे सोने की अंगूठी में जड़वाकर रविवार, सोमवार और बृहस्‍पतिवार के दिन धारण करना चाहिए। इस बात का अवश्‍य ध्‍यान रखें कि माणिक्‍य का स्‍पर्श आपकी त्‍वचा से अवश्‍य हो रहा हो।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि यदि आप माणिक्य धारण करना चाहते है तो 5 से 7 कैरेट का लाल या हलके गुलाबी रंग का पारदर्शी माणिक्य ताम्बे की या स्वर्ण अंगूठी में जड्वाकर किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम रविवार के दिन सूर्य उदय के पश्चात् अपने दाये हाथ की अनामिका में धारण करे  परंतु इसको घारण करने से पूर्व किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें ताकि आप इस बहुमूल्य रत्न द्वारा जीवन में अनेकों लाभ उठा पाएं. 
माणिक्य धारण तिथि से बारह दिन में प्रभाव देना प्रारंभ करता है और लगभग चार वर्ष तक पूर्ण प्रभाव देता है फिर निषक्रिय हो जाता है! अच्छे प्रभाव के लिए बन्कोक का पारदर्शी माणिक्य 5 से 7 कैरेट वजन में धारण करे! सस्ते और भद्दे रत्नों को धारण करने से लाभ के स्थान पर हानी हो सकती है!
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि माणिक्‍य को धारण करने से पूर्व इसे खरीद कर इसका शुद्धिकरण व जागृत करना बहुत आवश्‍यक है। शुद्धि‍करण के लिए इसे गाय के कच्‍चे दूध या फिर गंगा जल में कुछ समय रखकर, बाहर निकाल कर पानी से धोने के उपरांत फूल, तिलक और धूप दिखाना चाहिए। इसके बाद इसे धारण करते समय 7000 बार ऊं घृणि: सूर्याय नम: का उच्‍चारण कर धारण करना चाहिए। अंगूठी के शुधिकरण और प्राण प्रतिष्ठा करने के लिए सबसे पहले अंगूठी को दूध, गंगाजल, शहद, और शक्कर के घोल में डुबो कर रखे, फिर दीपक जलाकर सूर्य देव से  प्रार्थना करे की हे सूर्य देव मै आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न धारण कर रहा हूँ! मुझे आशीर्वाद प्रदान करे ! तत्पश्चात अंगूठी को जल से निकालकर ॐ घ्रणिः सूर्याय नम: मन्त्र का जाप 108 बारी करते हुए अंगूठी को अगरबती के ऊपर से घुमाये और 108 बार मंत्र जाप के बाद अंगूठी को विष्णु या सूर्य देव के चरणों से स्पर्श करवा कर बाद में अनामिका अंगुली में माणिक्य रत्न धारण करें।
"ओम् ह्रां ह्रीं, ह्रौं सः सूर्याय नमः" मंत्र का भी जप कर सकते हैं ।  कृतिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा अथवा रविपुष्य नक्षत्र में रविवार का दिन इस रत्न को धारण करना उत्तम होता है।

कैसे करता हैं सूर्य रत्न माणिक्य(रूबी) काम..(कैसे होता हैं माणिक्य का असर/प्रभाव)...
जिस तरह सेटेलाईट से बदलते मौसम की जानकारी मौसम वैज्ञानिकों को समय से पहले मिल जाती है ठीक उसी तरह सूर्य के रत्न माणिक्य में यह खूबी है कि यह आने वाली संकट की सूचना पहले दे देता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि, माणिक्य के विषय में मान्यता है कि जो व्यक्ति इसे धारण करता है वह अगर गंभीर रूप बीमार होने वाला होता है तो इसका रंग फीका हो जाता है।
अगर व्यक्ति की मृत्यु होने वाली होती है तो करीब तीन महीने पहले से माणिक्य का रंग सफेद होने लग जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि माणिक्य के विषय में यह भी मान्यता है कि पति-पत्नी दोनों अगर इसे धारण करते हैं तो पत्नी के बेवफाई करने पर पति द्वारा धारण किये गये माणिक्य का रंग फीका पड़ जाता है।
ठीक इसी तरह पति बेवफाई करे तो पत्नी द्वारा धारण किये गये माणिक्य का रंग फीका पड़ जाता है। माणिक्य में रक्त संबंधी रोगों को दूर करने की क्षमता है। तपेदिक से पीड़ित व्यक्ति अगर इसे धारण करे तो चिकित्सा का लाभ तेजी से प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जिनकी राशि अथवा लग्न सिंह, मेष, वृश्चिक, कर्क एवं धनु है उनके माणिक्य रत्न धारण करना बहुत ही शुभ होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि इसे धारण करने से दूषित विचारों को नियंत्रित करने में सफलता मिलती है। धार्मिक आस्था एवं पद-प्रतिष्ठा का लाभ मिलता है।

माणिक्‍य रत्न का विकल्‍प-----
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि माणिक्‍य बहुत मूल्‍यवान रत्‍न है। अत: सभी इसे खरीदकर पहने ऐसा संभव नही है। अत: कुछ ऐसे रत्‍न हैं जो माणिक्‍य से कम मूल्‍यवान है किन्‍तु माणिक्‍य के जैसे ही हैं। इसमें सबसे पहला स्‍थान स्‍पाइनेल का आता है जिसे हिन्‍दी में लालड़ी कहते हैं। दूसरा गारनेट रत्‍न है तीसरा जिरकॉन और चौथा एजेट हैं। माणिक्‍य न मिलने की स्थिति में या आर्थिक कारणों से माणिक्‍य न धारण कर पाने की स्‍थ‍िति में इन्‍हें धारण किया जा सकता है।

माणिक्य धारण में क्या रखें सावधानी---
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि जिस तरह से ये रत्‍न लाभ पहुंचाते हैं उसी तरह से यदि अनजाने में भी गलत रत्‍न धारण कर लें तो बहुत तेजी से शरीर को नुकसान भी पहुंचाते हैं। इसलिए ध्‍यान रखना चाहिए कि माणिक्‍य और उसके किसी भी विकल्‍प के साथ हीरा, नीलम, लहसुनिया और गोमेद को नहीं पहनना चाहिए।
ऐसे माणिक्य कदापि न खरीदें जिनमें चमक न हो, जिसका रंग दूध जैसा हो , जिस पर आड़ी - तिरछी रेखाएं हों, जिसमे दो रंग हों, जिसका रंग धुएं जैसा हो, जिसमे चीरा लगा हो, जो मट्मैला हो, जो सफेद या कालिमा युक्त हो, जिसमें गढ्ढा हो, ऐसे दोषयुक्त माणिक्य धारणकर्ता के लिए बेहद हानिकारक सिद्ध होते हैं. अत: इस प्रकार के माणिक्य कभी न खरीदें. शुद्धता की जाँच की बात करें तो यदि माणिक्य को गाय के दूध में डालने पर दूध गुलाबी दिखाई देने लगे तो उसे शुद्ध व असली समझें. इसके अलावा शुद्ध माणिक्य को किसी काँच के पात्र में रखने से ऐसा लगेगा , जैसे उस पात्र में रक्तिम किरणें फूट रही हैं.
हिंदी पंचांग में ज्येष्ठ माह में सूर्य बहुत शक्तिशाली रहता है और इसी कारण इस माह में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है. ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया कि माणिक्‍य सूर्य का रत्‍न है.किसी ज्‍योतिषाचार्य की सलाह से कुंडली में सूर्य की स्‍थ‍िति को देखकर ही इसको धारण करना चाहिए. माणिक्‍य सूर्य के प्रभाव को शुद्ध करता है और जातक धन आदि की अच्‍छी प्राप्‍ति कर पाता है |

क्‍यों लें ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री से सूर्य रत्न माणिक्य--
इस अंगूठी को ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री एवं उनके सहयोगी अनुभवी कर्मकांडी पंडितों की टीम ने सूर्य के मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित किया है जिससे यह आपको जल्‍द ही शुभ फल दे। इस अंगूठी के साथ सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा जो इस रत्‍न के ओरिजनल होने का प्रमाण है। इस अंगूठी से संबंधित किसी अन्‍य जानकारी के लिए 9039390067 पर संपर्क करें और अपने लिए इस अंगूठी को मंगवाने में देर न करें।
पंडित दयानन्द शास्त्री, (ज्योतिष-वास्तु सलाहकार)
PT. DAYANAND SHASTRI,                     
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