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जीआरपी की गश्त सुस्त,ट्रेन से लाखों के गहने से भरा बैग चोरी

उज्जैन। रेलवे सुरक्षा के लाख दावे करें किंतु जीआरपी और अन्य सुरक्षा एजेंसियो की नाक के नीचे से चोरी की वारदातें रूकने का नाम नहीं ले रही है। चलती ट्रेन से सोने के गहनों से भरे बैग की चोरी का ममला सामने आया है। दो मई को इंदौर निवासी डॉ. मनमोहन सिंह अपने पत्नी और छोटी बच्ची के साथ ट्रेन नंबर १२९२४ में मुलताई से इंदौर की यात्रा कर रहें थे। इस  ट्रेन के एस टू कोच में स्लीपर क्लास रिजर्वेशन करवाकरं डॉ. मनमोहन सिंह अपने परिवार के साथ अपने किसी रिश्तेदार के शादी समारोह से वापस इंदौर लौट रहे थे कि देवास के पास नींद से जगने पर जब अपने सामान से भरा बैग ढूंढा तो गायब मिला। डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार कई साड़िया व जेण्टस सुट के अलावा दो तोले सोने का हार,पांच तोले सोने की चार चुड़िया,तीन तोले की दो मोटी चुड़िया,ढाई तोले का मंगलसुत्र,तीन ग्राम की एक अंगुठी, सात ग्राम की झुमके,बच्चे के चांदी के पायल सहित अन्य सामान एक बड़े स्काई बेग में रखा हुआ था,जो बर्थ के नीचे रखा हुआ था। डॉ. सिंह के अनुसार यह बैग उन्होनें बर्थ के नीचे रखा हुआ था तथा नींद खुलने पर जब यह बैग देखा तो गायब मिला। डॉ. सिंह ने आस पास ढूंढा लेकिन बैग नहीं मिला, इस पर पुरी ट्रेन में सुरक्षाकर्मियों को तलाशा लेकिन कोई उपलब्ध नहीं था। ट्रेन के इंदौर पंहुचने पर डॉ. मनमोहन सिंह ने इसकी रिपोर्ट जीआरपी थाना में दर्ज करवाई जंहा भादवी की धारा ३७९ के तहत रिपोर्ट दर्ज कर मामले को उज्जेन जीआरपी को भेज दिया गया। इंदौर जीआरपी का कहना था कि यह चोरी उज्जेन जीआरपी के क्षैत्र में हुई है इसलिये मामला उज्जेन जीआरपी को भेजा जा रहा है। अब देखना है कि उज्जैन जीआरपी इस चोरी के मामले में कितनी तत्परता दिखाती है और कितनी जल्दी चोर को पकडती है।
भगवान भरोसे यात्रा
भारतीय रेल हमेशा किसी न किसी खामियों की वजह से सुर्खियों में रहती है वहीं सुरक्षा के मामले में भी रेलवे असफल दिखाई देती है तथा रेल से सफर करने वाले यात्रियों की जान माल की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। देखा जाता है कि सुरक्षा के नाम पर टिकिट चेकिंग कर टीटीई के अलावा सुरक्षा कर्मचारी भी उपरी कमाई करने में लगे रहते है जबकि सफर करने वाले हर नागरिक के जान माल का जि मा रेलवे सुरक्षा में लगे जीआरपी के साथ ही अन्य एजेंसियों की जि मेदारी होती है। लगभग रोज ही इन ट्रेनों में सफर करने वालों के सामान चोरी होते है जिनमें से कई तो कानुनी चक्कर से बचने की खातिर रिपोर्ट तक दर्ज नहीं करवाते है।
जिम्मा रेलवे का, हर्जाने का भी है प्रावधान
रेलवे से सफर कर रहे हर यात्री की जिम्मेदारी रेलवे की होती है तथा इसमेंं सफर कर रहे यात्री के जानमाल के नुकसान के हर्जाने का जि मा भी रेलवे का होता है। जानकारी के अभाव में आम आदमी अपने नुकसान को सहन कर लेता है किंतु यदि किसी भी व्यक्ति का वैधानिक टिकट पर रेलवे से यात्रा करते समय कोई जान माल का नुकसान होता है तो इसकी पुरी जि मेदारी रेलवे प्रशासन की होती है तथा यात्री रेलवे पर लापरवाही के आधार पर हर्जाने की मांग कर सकता है।

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