ब्रेकिंग न्यूज
logo
add image
Blog single photo

आचार्य शेखर को लेकर आया पैगाम-हिंदुत्व का सितारा अस्त कर दो

महामंडलेश्वर अतुलानंद सरस्वती (आचार्य शेखर) के नेतृत्व में हाल ही में निकाली गई शबरी के राम यात्रा के बाद राजनैतिक माहौल गर्मा गया है। एक और उज्जैन उत्तर से दावेदारों के दांत खट्टे हो गए हैं वहीं दूसरी ओर भगवा और हिंदुत्व विरोधियों की नींद उड़ गई है। यात्रा की संख्या को देखकर चुनावी पंडितों का दावा है कि यह आचार्य शेखर का शक्ति प्रदर्शन था। लेकिन आचार्य शेखर चुनाव लडऩे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। वर्तमान में भाजपा की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि पार्टी के पास आचार्य शेखर जैसा चेहरा नहीं है। यदि आचार्य शेखर चुनाव लड़ते हैं तो इनकी जीत संभव है और जीतकर बनेंगे उज्जैन के योगी। लेकिन हिंदुत्व विरोधी ताकतें ऐसा होने नहीं देना चाहती है। इसी कारण गौपनीय बैठकों का दौर चल रहा है। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि आचार्य शेखर को लेकर साजिश की जा रही है। जिहादियों ने हिंदुत्व का सितारा अस्त करने का पैगाम भेजा है।

उज्जैन आज तक न्यूज, उज्जैन।
क्यों हुआ फरमान जारी-समय-समय पर देशद्रोही और आतंकी संगठन देशभक्तों को निशाने पर रखने की धमकी देते आ रहे हैं। धमकियां उन्हें ही मिलती है जिनसे देशद्रोही गतिविधियां संचालित करने वालों को खतरा होता है। उन्हीं में से एक आचार्य शेखर भी है। आचार्य शेखर से देशद्रोहियों को खतरा यह है कि वे सदैव हिंदू समाज को एक करते आए हैं। वे अपने भाषणों में भी देशद्रोही ताकतों को खुलेआम चुनौती देते हैं। बीते दिनों आचार्य शेखर द्वारा शबरी के राम यात्रा आयोजित की गई थी। यात्रा में हजारों की संख्या में हिंदू युवा भगवा और शस्त्र लिए चल रहे थे। यह यात्रा एक तरह का शक्ति प्रदर्शन था। यात्रा को देखकर लग रहा था कि आचार्य शेखर के आह्वान पर हिंदू युवा जाग गया है। बताया जा रहा है कि जितनी संख्या यात्रा में प्रत्यक्ष रूप से दिखी उससे भी अधिक संख्या में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है। आने वाले कुछ माह में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। यदि आचार्य शेखर चुनाव लड़ते हैं तो देशद्रोहियों का जीना मुश्किल हो जाएगा। शायद इसी कारण एक धर्म स्थल पर बैठक आयोजित कर आचार्य शेखर को लेकर बयान जारी किए गए है। बयान में बहुत कुछ नहीं था परंतु अंदर ही अंदर बहुत कुछ चल रहा है। सूत्रों का दावा है कि कट्टरपंथी हिंदू विरोधियों ने तो हिंदुत्व के इस सितारे को अस्त करने का फरमान जारी किया है। वीडियो को देखकर ऐसा लगा कि आचार्य शेखर पर कभी भी हमला किए जाने का मौका ढूंढा जा रहा है। इस तरह की यदि कोई घटना घटित होती है तो अखंड हिंदू सेना के कार्यकर्ता शायद चुप नहीं बैठेंगे। प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं अन्य जिम्मेदारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

पहले भी गरजे आचार्य-
आचार्य शेखर वर्ष 2008 में 5 जुलाई को पहली बार चर्चाओ में आए। उस समय खाती समाज की जगदीश रथ यात्रा के दौरान कुछ दंगाइयों ने पत्थरबाजी की थी। विवाद के पश्चात पुलिस प्रशासन द्वारा शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आचार्य शेखर भी मौजूद थे। बैठक के दौरान शहर काजी शहर की फिजा बिगाडऩे की धमकी देने लगा। उस समय आचार्य शेखर ने अपने उग्र तेवर दिखाए और कहा था कि बैठक शांति के लिए बुलाई गई है। अब यदि धमकी दी तो मैं बताता हंू कि शांति कैसे भंग होती है और किस तरह फिजा बिगड़ती है। इतना बोलकर आचार्य शेखर बैठक छोड़ चले आए थे। आचार्य शेखर का रौद्र रूप देखकर हिंदू समाज का एक बड़ा धड़ा इनसे जुड़ गया था। बस तभी से आचार्य शेखर हिंदू विरोधियों की आंखों की किरकिरी बने हुए थे।

शबरी के राम यात्रा क्यों
आचार्य शेखर द्वारा वर्ष 2008 में अखंड हिंदू सेना की स्थापना की गई थी। स्थापना का उद्देश्य था हिंदू समाज जागे, एकत्रित हो और देशप्रेम से ओतप्रोत युवा पीढ़ी हो। कुछ वर्षों पहले अखंड हिंदू सेना के बैनरतलें शबरी के राम यात्रा निकाली गई। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता का भाव पैदा हो। इस वर्ष भी इसी उद्देश्य को लेकर युवाओं ने मेहनत की और परिणाम यात्रा में देखने को मिले। यात्रा की संख्या देखकर राजनीतिक दल भी अचंभित थे। इस वर्ष की यात्रा को देखकर देशभक्त और देशद्रोही दोनों ही सक्रिय हो गए।


पहले हो चुका है हिंदूवादी नेता पर हमला
पहले भी सिमी आतंकवादियों ने वर्ष २०११ में २७ मई को नागदा के विहिप जिला मंत्री एवं दैनिक स्वदेश के संवाददाता भेरूलाल टांक को अपना निशाना बनाया था। श्री टांक ने नागदा, उन्हेल में चल रही सिमी की गतिविधियों की शिकायत पुलिस को की थी। जिसके परिणाम स्वरूप टांक को प्राण घातक हमले का शिकार होना पड़ा था। श्री टांक नागदा केमिकल के सामने से कही जा रहे थे। घटना के समय टांक को तीन आरोपियों द्वारा चार गोली मारी गई थी जो उनके पेट, सीने, हाथ व एक अन्य जगह लगी थी। जिसकी रिपोर्ट नागदा के बिरलाग्राम थाने में अपराध क्रमांक ११२/११ पर धारा ३०७, २९४, ३४ भादवि दर्ज की गई। घटना की सूचना मिलते ही तात्कालिन कलेक्टर एम गीता, एसपी सतीश सक्सेना, एडीएम प्रकाश रैवाल एवं एएसपी अनिलसिंह कुशवाह सहित आला अधिकारी घटना स्थल पहुंच गए थे। घटना के विरोध में बजरंग दल एवं विहिप सड़कों पर उतर आया और नागदा बंद का आहवान कर दिया। घटना के विरोध में नागदा सहित आसपास के उन्हेल, महिदपुर, बड़नगर आदि इलाके भी बंद रहे। प्रशासन ने माहौल देखते ही धारा १४४ लागू कर दी थी। 
हमलावर निकले सिमी के-टांक पर हमला करने के आरोप में पुलिस द्वारा सिमी के अबू फैजल और फरहाद  को गिरप‹तार किया गया था। दोनों ने टांक पर हमला किए जाना कबूला था। दोनों ही इस आरोप में जेल में बंद हैं। अबू कुछ समय पूर्व ही खंडवा जेल तोड़कर भागा था जो फिर पकड़ाया जा चुका हैं। फैजल पर रतलाम में एटीएस द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान पुलिस पर हमला किए जाने के आरोप भी है। फैजल के द्वारा किए गए हमले में एक पुलिस जवान शहीद भी हुआ था। फैजल पर पुलिस जवान की हत्या का प्रकरण भी चल रहा है।
सिमी का उज्जैन से नाता
जनवरी २००७ -मुंबई ट्रेन धमाकों के आरोपी हयात-शाम ने मक्सी रोड पर कमरूद्दीन नागौरी के साथ बैठक कर देश में आतंक फैलाने की योजना तैयार की थी। ३१ मार्च २००८- उन्हेल में तात्कालिन टीआई यूपीसिंह ने हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे एक केंप पर छापा मारा था। यहां से पुलिस ने जादिल परवेज सहित ५ लोगों को आरोपी बनाया था।वर्ष २००८- तोपखाना मदारगेट क्षेत्र के लोगों ने सुबह उठते ही भड़काऊ पोस्टर देखे। खाराकुआ और महाकाल पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया। २७ मई २०११- आतंकी अबू फैजल के साथ मिलकर खाचरौद के फरहाद ने विहिप नेता भेरूलाल टांक को नागदा में गोली मारी। ४ जून २०११- अबू फैजल व उसकी सेल ने रतलाम में एटीएस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम पर गोली चलाई जिसमें एटीएस के एक जवान शहीद  हुए।

सिमी पर प्रतिबंध लेकिन गतिविधियां जारी
खूफिया विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक उज्जैन सिमी का गढ़ बताया जा रहा है। यहां करीब ५ दर्जन से अधिक सिमी कार्यकर्ता काम कर रहे हैं। इनमें से करीब ५० से अधिक लोगों पर भड़ाकाऊ भाषण एवं दंगा भड़काने के मामले पुलिस रिकार्ड में दर्ज हैं। 
सुजाउद्दीन -उज्जैन में सिमी का पहला कार्यकर्ता सुजाउद्दीन अगवान था। १९९९-२००० में विवादित पोस्टर 'या खुदा भेज दे मेहमूद कोई' के दिवारों पर लगाने के बाद इसका नाम चर्चाआें मे आया था। पुलिस ने इसके खिलाफ प्रकरण भी दर्ज किया था। वर्ष २००७ को इसकी डूबने से मौत हो गई थी।
मौहम्मद जुबैर पिता शरीफ खां- यह शिकारी गली उज्जैन का रहने वाला है। कभी आùटो रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका चलाने वाले जुबैर पर हथियार तस्करी के आरोप है। इसे वर्ष २००० में मुंबई पुलिस ने झिरनिया हथियार कांड में गिरप‹तार किया था। मुंबई के मध्यवती कारागार में इसका कैदी नंबर ७२०४ था।
फिर भी खत्म नहीं हुआ आतंक का सफर-इन प्रतिबंध के बावजूद भी सिमी के आतंकी सफर खत्म नहीं हुए। सिमी द्वारा कारवां-ए-सख्ते जां महिलाआें के लिए और शाहिन फोर्स बच्चों के लिए बनाए गए। यही नहीं तहरीके-हयां-ए-उम्मत प्रदेश स्तर पर सक्रिय है। स्थानीय स्तर पर मिल्ली एक्शन कमेटी और मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी सक्रिय है जिनकी गतिविधि संदिग्ध है। इन कमेटियों में इमरान अंसारी, सफदर नागौरी, इकबाल नागौरी, आमिल परवेज, कमरूद्दीन नागौरी आदि के जुड़े होने की जानकारी भी पुलिस को लगी है। सूत्रों के मुताबिक डीएसबी रिकार्ड में मालवांचल के करीब १५० सिमी सदस्यों के नाम मौजूद है।

सिमी का जहरीला नाग सफदर नागौरी।।।
सफदर नागौरी-यह सिमी का पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष है। इसका जन्म १९६९ को उज्जैन के महिदपुर की सेफी काùलोनी में हुआ था। इसकी प्रारंभिक शिक्षा महिदपुर में हुई थी। पढ़ाई के साथ-साथ महिदपुर के राजेन्द्र मार्ग में एक छोटी किराने की दुकान चलाता था। यहां की नागौरी काùलोनी में अभी भी इसका परिवार रहता है। ८० के दशक में यह पढ़ाई के लिए उज्जैन आया। वर्ष १९९० तक यह लोहे का पुल एवं तोपखाना इलाके में रहकर पढ़ाई करता रहा। इसी दौरान सिमी और कट्टरपंथियों के संपर्क में आया। यह पहले सिमी के साधारण कार्यकर्ता के रूप में जुड़ा। मास्टर माइंड होने के कारण यह राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद तक पहुंच गया।  इसने पोलिटेक्निक काùलेज में डिप्लोमा, विक्रम विश्वविद्यालय में एमजेएमसी का कोर्स किया है। यह सिमी की पत्रिका तहरीर व इस्लामिक मूवमेंट का प्रधान संपादक भी रहा है। इसके पिता जहरूल हसन नागौरी रिटायर्ड एएसआई थे।
सफदर पर दर्ज अपराधिक प्रकरण-३ दिसंबर १९९९ को इंदौर की छोटी ग्वालटोली थाने में प्रकरण क्रमांक २९३/९९ पर धारा १५३ (क) के तहत अपराध दर्ज किया गया।  २७ सितंबर २००१ को इंदौर में प्रकरण क्रमांक ३०५/०१ पर धारा १३ विधि विरूद्ध क्रिया कलाप अधिनियम देशद्रोह में इसके खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ। इस प्रकरण में इसके साथ उन्हेल के आमिल परवेज का भाई आजिल भी आरोपी है। ४ दिसंबर १९९७ को प्रकरण क्रमांक २१६/९७ में इसके खिलाफ इंदौर में धारा १५३ (क) का प्रकरण दर्ज हुआ। प्रकरण का चालान ३१ अगस्त १९९९ को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट वीना व्यास की १७ नंबर कोर्ट में पेश किया गया था। इस प्रकरण में इसके साथ १६ आरोपी थे। २९ जुलाई २००१ को प्रकरण क्रमांक २५१/२००१ एवं धारा १८८ भादवि में अपराध दर्ज किया गया। इस प्रकरण का चालान कोर्ट नंबर २८/१ न्यायाधीश विधि सक्सेना मेडम के यहां फोजदारी मुकदमा क्रमांक २५७ /०१ में दिनांक ४ सितंबर २००१ को चालान पेश किया गया। इस प्रकरण में इसके साथ ४ आरोपी थे।
अकील पिता मोहम्मद कुरैशी- यह उज्जैन के मदारगेट क्षेत्र का निवासी है। इसके खिलाफ खाराकुआ में दो व महाकाल एवं गुजरात के एक थाने में १-१ देश द्रोह के मुकदमे दर्ज है। २५ जुलाई २००६ को खाराकुआ पुलिस द्वारा इसको गिरप‹तार किया गया था। इस वक्त इसके साथी शफीर अंसारी और एम एन नईम भी इसके साथ पुलिस के शिकार बने थे। नईम सिमी की पत्रिका तहरीर ए मिल्लत का संपादक था। इसके पास ढेर सारे भड़काऊ साहित्य पुलिस द्वारा बरामद किए थे। डेढ़ वर्ष तक जेल में रहने के बाद अकील जमानत पर रिहा हुआ था। तभी से वह फरार है।
कांट्रेक्ट किलर भी है अकील-अकील के बारे में बताया जाता है कि वह हत्या की सुपारी भी लेता था। वर्ष २००९ में उसने हिमाचल प्रदेश के मछाला गांव के जीएम पार्टिशियन उद्योग के तीन कर्मचारियों की हत्या की सुपारी भी ली थी। अपराध के पूर्व ही वह एक पिस्टल, ९ कारतूस और २ मोबाइल के साथ पकड़ाया था। यह सुपारी अकील को गुजरात के एक उद्योगपति द्वारा दी गई थी। मामले में अकील बरोहीवाला हिमाचल प्रदेश इलाके से पकड़ाया था।
इकरार शेख पिता रऊफ निवासी मेली गली बहादुरगंज उज्जैन-इसका नाम अहमदाबाद बम विस्फोट में सबसे पहले आया था। इसकी शादी नागझिरी में रहने वाली एक लड़की से देवास के सामुहिक विवाह सम्मेलन में हुई थी। वर्ष २००० में भड़काऊ पोस्टर लगाने का मामला इसके खिलाफ दर्ज हुआ था। ६ वषाô तक फरार रहने के बाद फरवरी २००७ में महाकाल पुलिस ने इसे गिरप‹तार किया। करीब १ वर्ष तक जेल में रहने के बाद जनवरी २००८ में इसको जमानत मिली तभी से यह फरार है।
कानून का जानकार है इकरार-मोहम्मद इकरार के बारे में बताया जा रहा है कि वह एम काùम तक शिक्षित है। विद्यार्थीकाल से ही वह सिमी की गतिविधियों में सक्रिय है। सबसे पहले सिमी का सामान्य कार्यकर्ता बना इसके बाद वह अंसार (सक्रिय कार्यकर्ता) बनने के बाद वह सिमी के लिए कानूनी एवं आर्थिक मदद दिलाने में सक्रिय हो गया। इसीलिए उसे स्टेट लिगल हेड का दर्जा प्राप्त हुआ। कुछ समय बाद वह बिहार का इंचार्ज भी बनाया गया।
(इनमें से कुछ सिमी सपोलों को न्यायालय ने दोषमुक्त भी किया है। परंतु ये अंदरूनी तौर पर फिर सिमी का नेटवर्क तैयार करने में लगे हैं।)

ताजा टिप्पणी

  • Blog single photo
    Apr 30, 2018

    निर्दोष निर्भय

    शानदार आलेख । आचार्य शेखर को इस बार टिकिट मिलना चाहिये तो ही महाकाल व् उसका क्षेत्र सुरक्षित रहेगा । पारस जैसे लल्लू मंत्री कुछ नही कर सकते । ये हिन्दुओ से ज्यादा मुसलमानों को तवज्जो देते है ।

टिप्पणी करे

Top