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उज्जैन नगर निगम अपर आयुक्त जैन पर लोकायुक्त कार्रवाई

आय से अधिक मिली संपत्ति
उज्जैन आज तक न्यूज, उज्जैन। 25 अप्रैल की सुबह नगर निगम के अपर आयुक्त रवींद्र जैन के निवास पर लोकायुक्त टीम द्वारा छापा डाला गया। यहां शिवांश एलीजेंस मल्टी में कार्रवाई व पूछताछ के बाद लोकायुक्त टीम अपर आयुक्त को लेकर उनके गीता भवन क्षेत्र इंदौर में दिलजीत हाइट्स निवास के लिए लेकर रवाना हो गई।  लोकायुक्त पुलिस के अनुसार सन 2014 में नगर निगम में पदस्थ है। लोकायुक्त को इस बात की शिकायत मिली थी कि अपर आयुक्त के पद पर रहते हुए जैन ने आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित कर रखी है तथा वर्ष 2014 से 2016-17 तक लगातार प्रापर्टी खरीद रहे है। अत: एक साथ उज्जैन इंदौर में लोकायुक्त की कार्रवाई शुरू हुई है। हालांकि उज्जैन निवास पर घरेलू सामान तथा एक इंडिगो गाड़ी मिली है। सामान मित्रों द्वारा उपलब्ध कराना तथा गाड़ी किराये से अटैच होना बताई गई है। पुलिस पता कर रही है कि उज्जैन-इंदौर के अलावा गुना जहां रविन्द्र जैन का मूल निवास है और कटनी जहां पुत्री की शादी की है,वहां भी कोई प्रापर्टी या ज्वैलरी, डिपाजिट आदि तो नहीं है।
लोकायुक्त टीम ने हरिफाटक-नानाखेड़ा रिंगरोड पर स्थित मल्टी शिवांश में दबिश दी। जहाँ पर अपर आयुक्त जैन किराए से रहते हंै। सुबह 6 बजे उनके पहुंचते ही अपर आयुक्त जैन कुछ समय खामौश रहे फिर लोकायुक्त टीम से कहा आइये सर। फिर अंदर पहुंचते ही पत्नी संध्या जैन को बताया कि लोकायुक्त टीम कार्रवाई करने आई है। यह सुनते ही वे बेहोश हो गई। तब श्री जैन ने उन्हें ज्यूस पिलाया। लोकायुक्त अधिकारियों ने भी श्रीमती जैन से कहा कि घबराइये मत हम इन्हें पकडक़र नहीं ले जा रहे हैं। प्रापर्टी की जांच करने आए हैं। इसके बाद जैन दंपत्ति लोकायुक्त टीम के साथ इंदौर चले गए जहां उनके निवास पर कार्रवाई की गई। बताया जाता है कि छापा पडऩे का महत्वपूर्ण कारण यह है कि जैन ने हाल ही में इंदौर के स्कीम नंबर 94 में अपने प्लाट पर आधुनिक सुविधाओं से लैस एक तीन मंजिला होस्टल किराये पर देने के लिए तैयार किया है। इसमें 13 कमरे और एक किचन बनाया है। यह होस्टल चर्चाओं में था। इंदौर जैसी महंगी सिटी में इतना बड़ा हास्टल तैयार करना और उसे किराये के लिए उपयोग में लाना चर्चाओं में था। इन्हीं चर्चाओं के चलते लोकायुक्त की नजर जैन पर पड़ी और उनकी आय से करीब 10 गुना अधिक संपत्ति उजागर हुई। लोकायुक्त एसपी गितेश गर्ग के अनुसार आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने पर पहले उसका गोपनीय सत्यापन किया गया। फिर विधिवत प्रथम अपर सत्र एवं विशेष न्यायाधीश उज्जैन से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद यह कार्रवाई की गई थी। कार्रवाई में डीएसपी वेदांत शर्मा, शैलेंद्रसिंह ठाकुर, निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव, निरीक्षक हितेश पाटिल, अंतिम पंवार, जितेन्द्र पाल, मोहन मिश्रा, विमल जैन, अशोक खत्री आदि शामिल थे।
नौकरी में कमाए करोड़ों
रविन्द्र जैन मूलत: गुना के रहने वाले हैं।वर्ष 1982 में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में इनकी नियुक्ति हुई। अक्टूबर 2014 में इंदौर से पदोन्नत होकर उज्जैन नगर पालिका में अपर आयुक्त बने। सिंहस्थ 2016 के दरमियान स्थापना, कॉलोनी सेल और पीएचई के चार्ज भी इनके पास रहे। यही नहीं इनके पास कॉलोनी सेल, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग संपत्ति कर, राजस्व विभाग(अन्य कर), उद्यान, पीएम आवास, अमृत मिशन, तरण ताल, जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट सेल, सूचना का अधिकार अधिनियम अंतर्गत अपीलीय अधिकारी, झोन क्रमांक 4, 5 एवं 6 शामिल है। इन संबंधित विभागों की फाइल उपायुक्त जैन के पास से ही होकर गुजरती है। कॉलोनी सेल का चार्ज तो था ही अन्य कई महत्वपूर्ण विभाग इन्हें मार्च 2018 में अपर आयुक्त रैवाल के तबादले के बाद मिले थे। नौकरी में देखा जाए तो इन्होंने 90 लाख रूपए के करीब वेतन बनता है। परंतु जैन के पास करीब 10 करोड़ की संपत्ति उजागर हुई है।
छापे में यह मिला
इंदौर में दिलपंसद हाईटस मे फ्लैट नंबर 502 कीमत 17 लाख रूपए इस फ्लेट में करीब 20 लाख रूपए का घरेलू सामान,  स्कीम नंबर 94 में 1500 वर्गफीट भूखंड पर बना तीन मंजिला हॉस्टल कीमत 79 लाख रूपए, इंदौर एबी रोड स्थित वायब्रेंट बिल्डिंग पर बड़ा कमर्शियल ऑफिस कीमत 45 लाख,  म्यूचल फंउ में 20 लाख का निवेश, विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि 25 लाख, नगद 3 लाख 30 हजार, 7 लाख रुपए के आभूषण, टाटा इंडिका विस्टा कार कीमत 5 लाख रूपए।
319 कर्मचारियों का विनियमितीकरण किया
अपर आयुक्त स्थापना पद पर रहते पिछले दिनों रवींद्र जैन ने नगर निगम के वर्ष 2007 तक के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का विनियमितीकरण किया था। मामले में भी लेनदेन की बातें लोकायुक्त के सामने आई थी। इसके अलावा वर्ष 2007 के बाद के शासन के अनुमोदन-अनुमति से रखे कर्मचारियों को विनियमितिकरण का लाभ देने की फाइल जैन ने अटका रखी है। इसके लिए भी आर्थिक लाभ लेने के प्रयास हो रहे थे। ऐसे कर्मचारियों की निगम में करीब तीन सौ की संख्या है।
दो महीने पहले पकड़ाया था झोन का अफसर
नगर निगम में भ्रष्टाचार किस तरह हावी है यह लोकायुक्त कार्रवाई से ही पता चलता है। दो माह पूर्व 28 फरवरी 2018 को नगर निगम के झोन क्रमांक 1 का अफसर चंद्रकांत शुक्ला ठेकेदार अभिजीतसिंह राठौर से 40 हजार के भुगतान की मांग को लेकर 10 हजार की रिश्वत लेते पकड़ाया था। ठेकेदार द्वारा की गई शिकायत पर लोकायुक्त ने यह कार्रवाई की गई थी। नगर निगम में ठेकेदारों एवं अन्य मामलों में रिश्वत लिया जाना आम बात है परंतु संभवत: ठेकेदार बहुत अधिक परेशान हुआ होगा तब जाकर उसने शिकायत की होगी।
इस तरह की कार्रवाई अन्यों पर भी हो
नगर निगम भ्रष्टाचार का एक बड़ा अखाड़ा बन गया है। पूर्व में भी यहां स्टोर विभाग के एक चपरासी के यहां दस करोड़ रूपये की सम्पत्ति बरामद हुई थी। एक अन्य रिमूवल गैंग कर्मी के यहां तीन करोड़ की सम्पत्ति सामने आई थी तथा नगर निगम के पूर्व गैंग प्रभारी बाली को भी रिश्वत खोरी में पकड़ा गया। यहां के चपरासी से लेकर अधिकारी तक भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे है। लोकायुक्त कार्रवाई करे तो करोड़ों की बेमानी सम्पत्ति अर्जित करने वालों व भ्रष्टाचारियों के चेहरे उजागर हो सकते है।



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