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भगवान राम के चरित्र को जीवन में उतरने से ही श्रेष्ठ भारत का निर्माण होगा - मुरलीधर जी

वनवासी, गिरवासी, दलित और अंतिम पंक्ति के पिछडे सभी माँ भारती की संतान हैं, भगवान राम की भांति उन्हें गले लगाना ही माँ भारती की सच्ची सेवा है - स्वामी चिदानंद सरस्वती
कारसेवकपुरम, अयोध्या 21 अप्रैल । भगवान श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण शीघ्र हो इसी प्रयोजन को लेकर श्री राम कथा का आयोजन किया गया है । सांसद फैजाबाद श्री लल्लन सिंह, विधायक श्री वेद प्रकाश गुप्ता, मेयर अयोध्या श्री ऋषिकेश उपाध्याय, श्री बाबूलाल मेरवा, पूर्व मंत्री मध्य प्रदेश शासन, श्री अजय पंवार और आयोजक श्री सतीश जी वैष्णव ने दीप प्रज्वलित कर श्री राम कथा का आज प्रातः विधिवत शुभारंभ किया । श्री चंपतराय जी विश्व हिंदू परिषद और आयोजक परिवार ने श्री रामचरितमानस की आरती के साथ आज की कथा को विराम दिया । इस अवसर पर आयोजक श्री वैष्णव ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय श्री भगवान दास जी जावरा और माता स्वर्गीय श्रीमती पतासीबाई की हार्दिक इच्छा थी भगवान श्री राम के मंदिर का निर्माण शीघ्र हो लेकिन यह इच्छा उनके जीते जी पूरी नहीं हो पाई । माता पिता की स्मृति में श्री सतीश जी वैष्णव उनकी पत्नी शालिनी उनके पुत्र वैभव और सौरव तथा बेटी नेहा ने यह निश्चय किया कि वे अपने पूर्वजों की इच्छापूर्ति के लिए कुछ ऐसा करें कि भगवान राम के मंदिर का निर्माण शीघ्र हो इसी प्रयोजन के लिए उन्होंने परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के परमाध्यक्ष स्वामी श्री चिदानंद सरस्वती जी और कथा व्यास श्री मुरलीधर जी के मार्गदर्शन में कारसेवकपुरम अयोध्या में श्रीराम कथा के आयोजन का निर्णय किया । आज की कथा का शुभारम्भ करते हुए कथा व्यास श्री मुरलीधर जी ने भगवान् श्री राम कथा का महातम्य बताया और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जीवन से लेकर परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व में सुख-शांति, समृद्धि और श्रेष्ठता के लिए केवल राम चरित्र को आत्मसात करने का मार्गदर्शन दिया ।     परमार्थ निकेतन ऋषिकेश से पधारे श्री लोकेश शर्मा जी ने बताया कि कथा का मुख्य उद्देश्य जन-जागरण है। कथा के माध्यम से स्वास्थ्य, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण, नदी-जल संरक्षण, वृक्षारोपण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नशा मुक्ति और राष्ट्रभक्ति जैसे संस्कृति परक मुद्दों के प्रति जागरूकता का लक्ष्य प्रमुखता से रहेगा । परमार्थ परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद जी ने आज कथा शुभारंभ के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि ऊंच-नीच, छोटे-बडे के भाव को समाप्त कर वनवासी, गिरवासी, पिछडे और दलित जो सभी मां भारती की संतान हैं, भगवान राम की भांति हमें उन्हें गले लगाना होगा, राष्ट्र की मुख्य धारा में लाकर भारत को श्रेष्ठता के शिखर पर पुनः प्रतिष्ठित करना होगा यही माँ भारती की सच्ची सेवा है । राष्ट्र को एक सूत्र में आबद्ध करने के लिए, ऊंच नीच और भेदभाव को मिटाने के उद्देश्य से राष्ट्र के प्रमुख साधु-संतों का उद्बोधन और आशीर्वचन नौ दिवसीय श्री राम कथा में प्रतिदिन बना रहेगा । 29 अप्रैल को समापन के अवसर पर परमार्थ परमाध्यक्ष स्वामी श्री चिदानंद सरस्वती जी के साथ-साथ राष्ट्र और प्रदेश के प्रमुख समाज सेवकों की उपस्थित संभावित है ।

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